गोदान - Godan

भी तो वैसी ही चटोरिन आई हैं। अबकी सबों ने दो रुपए के खरबूजे उधार खा डाले। उधार मिल जाय, फिर उन्हें चिंता नहीं होती कि देना पड़ेगा या नहीं।'

'अरे भोला रोते काहे को हैं?'

गोबर आ कर बोला - भोला दादा आ पहुँचे। मन-दो-मन भूसा है, वह उन्हें दे दो, फिर उनकी सगाई ढूँढने निकलो!

धनिया ने समझाया - आदमी द्वार पर बैठा है, उसके लिए खाट-वाट तो डाल नहीं दी, ऊपर से लगे भुनभुनाने। कुछ तो भलमनसी सीखो। कलसा ले जाओ, पानी भर कर रख दो,


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भी तो वैसी ही चटोरिन आई हैं। अबकी सबों ने दो रुपए के खरबूजे उधार खा डाले। उधार मिल जाय, फिर उन्हें चिंता नहीं होती कि देना पड़ेगा या नहीं।'

'अरे भोला रोते काहे को हैं?'

गोबर आ कर बोला - भोला दादा आ पहुँचे। मन-दो-मन भूसा है, वह उन्हें दे दो, फिर उनकी सगाई ढूँढने निकलो!

धनिया ने समझाया - आदमी द्वार पर बैठा है, उसके लिए खाट-वाट तो डाल नहीं दी, ऊपर से लगे भुनभुनाने। कुछ तो भलमनसी सीखो। कलसा ले जाओ, पानी भर कर रख दो,


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