गोदान - Godan



पुनिया ने पूछा - क्या अभी तेरे घर आग नहीं जली, क्या री?

रूपा ने दीनता से कहा - आज तो घर में कुछ था ही नहीं, आग कहाँ से जलती?

'तो फिर आग काहे को माँगने आई है?'

'दादा तमाखू पिएँगे।'

पुनिया ने उपले की आग उसकी ओर फेंक दी, मगर रूपा ने आग उठाई नहीं और समीप जा कर बोली - तुम्हारी रोटियाँ महक रही हैं काकी! मुझे बाजरे की रोटियाँ बड़ी अच्छी लगती हैं।

पुनिया ने मुस्करा कर पूछा - खाएगी?

'अम्माँ डाँटेंगी।'

'अम्माँ से कौन कहने जायगा?'


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पुनिया ने पूछा - क्या अभी तेरे घर आग नहीं जली, क्या री?

रूपा ने दीनता से कहा - आज तो घर में कुछ था ही नहीं, आग कहाँ से जलती?

'तो फिर आग काहे को माँगने आई है?'

'दादा तमाखू पिएँगे।'

पुनिया ने उपले की आग उसकी ओर फेंक दी, मगर रूपा ने आग उठाई नहीं और समीप जा कर बोली - तुम्हारी रोटियाँ महक रही हैं काकी! मुझे बाजरे की रोटियाँ बड़ी अच्छी लगती हैं।

पुनिया ने मुस्करा कर पूछा - खाएगी?

'अम्माँ डाँटेंगी।'

'अम्माँ से कौन कहने जायगा?'


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