'होरी ने करुण-कंठ से कहा - क्या बताऊँ महाराज, परती रहेंगे।
'परती रहेंगे? यह तो बड़ा अनर्थ होगा।'
'भगवान की यही इच्छा है, तो अपना क्या बस।'
'मेरे देखते तुम्हारे खेत कैसे परती रहेंगे? कल मैं तुम्हारी बोआई करा दूँगा। अभी खेतों में कुछ तरी है। उपज दस दिन पीछे होगी, इसके सिवा और कोई बात नहीं। हमारा-तुम्हारा आधा साझा रहेगा। इसमें न तुम्हें कोई टोटा है, न मुझे। मैंने आज बैठे-बैठे सोचा, तो चित्त बड़ा दुखी हुआ कि जुते-जुताए खेत परती रहे जाते हैं।'
'होरी ने करुण-कंठ से कहा - क्या बताऊँ महाराज, परती रहेंगे।
'परती रहेंगे? यह तो बड़ा अनर्थ होगा।'
'भगवान की यही इच्छा है, तो अपना क्या बस।'
'मेरे देखते तुम्हारे खेत कैसे परती रहेंगे? कल मैं तुम्हारी बोआई करा दूँगा। अभी खेतों में कुछ तरी है। उपज दस दिन पीछे होगी, इसके सिवा और कोई बात नहीं। हमारा-तुम्हारा आधा साझा रहेगा। इसमें न तुम्हें कोई टोटा है, न मुझे। मैंने आज बैठे-बैठे सोचा, तो चित्त बड़ा दुखी हुआ कि जुते-जुताए खेत परती रहे जाते हैं।'