गोदान - Godan

मैं तुमसे अपना दु:ख न कहूँगा तो किससे कहूँगा? अच्छा जो हुआ, चलो, बेंग ही के साथ तुम्हें मन-दो-मन अनाज खाने को भी तौल दूँगा।

आधा घंटे में होरी मन-भर जौ का टोकरा सिर पर रखे आया और घर की चक्की चलने लगी। धनिया रोती थी और सोना के साथ जौ पीसती थी। भगवान उसे किस कुकर्म का यह दंड दे रहे हैं!

दूसरे दिन से बोआई शुरू हुई। होरी का सारा परिवार इस तरह काम में जुटा हुआ था, मानो सब कुछ अपना ही है। कई दिन के बाद सिंचाई भी इसी तरह


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मैं तुमसे अपना दु:ख न कहूँगा तो किससे कहूँगा? अच्छा जो हुआ, चलो, बेंग ही के साथ तुम्हें मन-दो-मन अनाज खाने को भी तौल दूँगा।

आधा घंटे में होरी मन-भर जौ का टोकरा सिर पर रखे आया और घर की चक्की चलने लगी। धनिया रोती थी और सोना के साथ जौ पीसती थी। भगवान उसे किस कुकर्म का यह दंड दे रहे हैं!

दूसरे दिन से बोआई शुरू हुई। होरी का सारा परिवार इस तरह काम में जुटा हुआ था, मानो सब कुछ अपना ही है। कई दिन के बाद सिंचाई भी इसी तरह


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