गोदान - Godan



सोना ने बाहर आ कर कहा - भाभी, अम्माँ ने कहा है, अनाज निकाल कर धूप में डाल दो, नहीं चोकर बहुत निकलेगा। पंडित ने जैसे बखार में पानी डाल दिया हो।

मातादीन ने अपने सफाई दी - मालूम होता है, तेरे घर में बरसात नहीं हुई। चौमासे में लकड़ी तक गीली हो जाती है, अनाज तो अनाज ही है।

यह कहता हुआ वह बाहर चला गया। सोना ने आ कर उसका खेल बिगाड़ दिया।

सोना ने झुनिया से पूछा - मातादीन क्या करने आए थे?

झुनिया ने माथा सिकोड़ कर कहा - पगहिया माँग रहे थे। मैंने कह दिया,


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सोना ने बाहर आ कर कहा - भाभी, अम्माँ ने कहा है, अनाज निकाल कर धूप में डाल दो, नहीं चोकर बहुत निकलेगा। पंडित ने जैसे बखार में पानी डाल दिया हो।

मातादीन ने अपने सफाई दी - मालूम होता है, तेरे घर में बरसात नहीं हुई। चौमासे में लकड़ी तक गीली हो जाती है, अनाज तो अनाज ही है।

यह कहता हुआ वह बाहर चला गया। सोना ने आ कर उसका खेल बिगाड़ दिया।

सोना ने झुनिया से पूछा - मातादीन क्या करने आए थे?

झुनिया ने माथा सिकोड़ कर कहा - पगहिया माँग रहे थे। मैंने कह दिया,


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