भोग-विलास नहीं चाहते, खाली मोटा-झोटा पहनना, और मोटा-झोटा खाना और मरजाद के साथ रहना चाहते हैं। वह भी नहीं सकोता।
सोभा ने धूर्तता के साथ कहा - मैं तो दादा, इन सबों को अबकी चकमा दूँगा। जमादार को कुछ दे-दिला कर इस बात पर राजी कर लूँगा कि रुपए के लिए हमें खूब दौड़ाएँ। झिंगुरी कहाँ तक दौड़ेंगे।
होरी ने हँस कर कहा - यह सब कुछ न होगा भैया! कुसल इसी में है कि झिंगुरीसिंह के हाथ-पाँव जोड़ो। हम जाल में फँसे हुए हैं। जितना ही फड़फड़ाओगे, उतना ही और जकड़ते जाओगे।
भोग-विलास नहीं चाहते, खाली मोटा-झोटा पहनना, और मोटा-झोटा खाना और मरजाद के साथ रहना चाहते हैं। वह भी नहीं सकोता।
सोभा ने धूर्तता के साथ कहा - मैं तो दादा, इन सबों को अबकी चकमा दूँगा। जमादार को कुछ दे-दिला कर इस बात पर राजी कर लूँगा कि रुपए के लिए हमें खूब दौड़ाएँ। झिंगुरी कहाँ तक दौड़ेंगे।
होरी ने हँस कर कहा - यह सब कुछ न होगा भैया! कुसल इसी में है कि झिंगुरीसिंह के हाथ-पाँव जोड़ो। हम जाल में फँसे हुए हैं। जितना ही फड़फड़ाओगे, उतना ही और जकड़ते जाओगे।