उधार दे कर अपने जाल में फँसा लेता है। मैं तो उसी दिन रुपए लेने जाऊँगा, जिस दिन झिंगुरी कहीं चला गया होगा।
होरी का मन भी विचलित हुआ - हाँ, यह ठीक है।
'ऊख तुलवा देंगे। रुपए दाँव-घात देख कर ले आएँगे।'
'बस-बस, यही चाल चलो।'
दूसरे दिन प्रात:काल गाँव के कई आदमियों ने ऊख काटनी शुरू की। होरी भी अपने खेत में गँड़ासा ले कर पहुँचा। उधर से सोभा भी उसकी मदद को आ गया। पुनिया, झुनिया, कोनिया, सोना सभी खेत में जा पहुँचीं। कोई ऊख काटता था,
उधार दे कर अपने जाल में फँसा लेता है। मैं तो उसी दिन रुपए लेने जाऊँगा, जिस दिन झिंगुरी कहीं चला गया होगा।
होरी का मन भी विचलित हुआ - हाँ, यह ठीक है।
'ऊख तुलवा देंगे। रुपए दाँव-घात देख कर ले आएँगे।'
'बस-बस, यही चाल चलो।'
दूसरे दिन प्रात:काल गाँव के कई आदमियों ने ऊख काटनी शुरू की। होरी भी अपने खेत में गँड़ासा ले कर पहुँचा। उधर से सोभा भी उसकी मदद को आ गया। पुनिया, झुनिया, कोनिया, सोना सभी खेत में जा पहुँचीं। कोई ऊख काटता था,