सोभा बरस पड़ा। बोला - मेरे पास रुपए नहीं हैं, तुम्हें जो कुछ करना हो, कर लो।
पटेश्वरी ने गरम हो कर कहा - ऊख बेची है कि नहीं?
'हाँ, बेची है।'
'तुम्हारा यही वादा तो था कि ऊख बेच कर रूपया दूँगा!'
'हाँ, था तो।'
'फिर क्यों नहीं देते! और सब लोगों को दिए हैं कि नहीं?'
'हाँ, दिए हैं।'
'तो मुझे क्यों नहीं देते?'
'मेरे पास अब जो कुछ बचा है, वह बाल-बच्चों के लिए है।'
पटेश्वरी ने बिगड़ कर कहा - तुम रुपए दोगे, सोभा और हाथ जोड़ कर और आज ही। हाँ,
सोभा बरस पड़ा। बोला - मेरे पास रुपए नहीं हैं, तुम्हें जो कुछ करना हो, कर लो।
पटेश्वरी ने गरम हो कर कहा - ऊख बेची है कि नहीं?
'हाँ, बेची है।'
'तुम्हारा यही वादा तो था कि ऊख बेच कर रूपया दूँगा!'
'हाँ, था तो।'
'फिर क्यों नहीं देते! और सब लोगों को दिए हैं कि नहीं?'
'हाँ, दिए हैं।'
'तो मुझे क्यों नहीं देते?'
'मेरे पास अब जो कुछ बचा है, वह बाल-बच्चों के लिए है।'
पटेश्वरी ने बिगड़ कर कहा - तुम रुपए दोगे, सोभा और हाथ जोड़ कर और आज ही। हाँ,