गोदान - Godan

भाग्य को रो रहा था। धनिया का मुस्कराना उसे न दिखाई दिया। बोला - मजूरी तो मिलेगी। मजूरी करके खाएँगे। धनिया ने पूछा - कहाँ है इस गाँव में मजूरी? और कौन मुँह ले कर मजूरी करोगे? महतो नहीं कहलाते!

होरी ने चिलम के कई कश लगा कर कहा - मजूरी करना कोई पाप नहीं। मजूर बन जाय, तो किसान हो जाता है। किसान बिगड़ जाय तो मजूर हो जाता है। मजूरी करना भाग्य में न होता हो यह सब विपत क्यों आती? क्यों गाय मरती? क्यों लड़का नालायक निकल जाता?


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भाग्य को रो रहा था। धनिया का मुस्कराना उसे न दिखाई दिया। बोला - मजूरी तो मिलेगी। मजूरी करके खाएँगे। धनिया ने पूछा - कहाँ है इस गाँव में मजूरी? और कौन मुँह ले कर मजूरी करोगे? महतो नहीं कहलाते!

होरी ने चिलम के कई कश लगा कर कहा - मजूरी करना कोई पाप नहीं। मजूर बन जाय, तो किसान हो जाता है। किसान बिगड़ जाय तो मजूर हो जाता है। मजूरी करना भाग्य में न होता हो यह सब विपत क्यों आती? क्यों गाय मरती? क्यों लड़का नालायक निकल जाता?


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