गोदान - Godan



होरी ने कहा - जान पड़ता है, सातों अध्याय पूरे हो गए। आरती हो रही है।

सोभा बोला - हाँ, जान तो पड़ता है, चलो आरती ले लें।

होरी ने चिंतित भाव से कहा - तुम जाओ, मैं थोड़ी देर में आता हूँ।

ध्यानसिंह जिस दिन आए थे, सबके घर सेर-सेर भर मिठाई बैना भेजी थी। होरी से जब कभी रास्ते में मिल जाते, कुशल पूछते। उनकी कथा में जा कर आरती में कुछ न देना अपमान की बात थी।

आरती का थाल उन्हीं के हाथ में होगा। उनके सामने होरी कैसे खाली


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होरी ने कहा - जान पड़ता है, सातों अध्याय पूरे हो गए। आरती हो रही है।

सोभा बोला - हाँ, जान तो पड़ता है, चलो आरती ले लें।

होरी ने चिंतित भाव से कहा - तुम जाओ, मैं थोड़ी देर में आता हूँ।

ध्यानसिंह जिस दिन आए थे, सबके घर सेर-सेर भर मिठाई बैना भेजी थी। होरी से जब कभी रास्ते में मिल जाते, कुशल पूछते। उनकी कथा में जा कर आरती में कुछ न देना अपमान की बात थी।

आरती का थाल उन्हीं के हाथ में होगा। उनके सामने होरी कैसे खाली


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