तो अच्छा, पुरुषों के कान तो गर्म करती रहें।
आज गोविंदी के मन में मालती के प्रति बड़ी सहानुभूति उत्पन्न हुई। वह मालती पर आक्षेप करके उसके साथ अन्याय कर रही है। क्या मेरी दशा को देख कर उसकी आँखें न खुलती होंगी? विवाहित जीवन की दुर्दशा आँखों देख कर अगर वह इस जाल में नहीं फँसती, तो क्या बुरा करती है!
चिड़ियाघर में चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था। गोविंदी ने ताँगा रोक दिया और बच्चे को लिए हरी दूब की तरफ चली, मगर दो ही तीन
तो अच्छा, पुरुषों के कान तो गर्म करती रहें।
आज गोविंदी के मन में मालती के प्रति बड़ी सहानुभूति उत्पन्न हुई। वह मालती पर आक्षेप करके उसके साथ अन्याय कर रही है। क्या मेरी दशा को देख कर उसकी आँखें न खुलती होंगी? विवाहित जीवन की दुर्दशा आँखों देख कर अगर वह इस जाल में नहीं फँसती, तो क्या बुरा करती है!
चिड़ियाघर में चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था। गोविंदी ने ताँगा रोक दिया और बच्चे को लिए हरी दूब की तरफ चली, मगर दो ही तीन