कपोलों में मुँह छिपा कर कहा - वह तो यहीं बैठी हुई हैं।
'कहाँ, मैं तो नहीं देख रही हूँ।'
'मैं उसी देवी से बोल रहा हूँ।'
गोविंदी ने जोर से कहकहा मारा - आपने आज मुझे बनाने की ठान ली, क्यों?
मेहता ने श्रद्धानत हो कर कहा - देवी जी, आप मेरे साथ अन्याय कर रही हैं, और मुझसे ज्यादा अपने साथ। संसार में ऐसे बहुत कम प्राणी हैं, जिनके प्रति मेरे मन में श्रद्धा हो। उन्हीं में एक आप हैं। आपका धैर्य और त्याग और शील और प्रेम अनुपम
कपोलों में मुँह छिपा कर कहा - वह तो यहीं बैठी हुई हैं।
'कहाँ, मैं तो नहीं देख रही हूँ।'
'मैं उसी देवी से बोल रहा हूँ।'
गोविंदी ने जोर से कहकहा मारा - आपने आज मुझे बनाने की ठान ली, क्यों?
मेहता ने श्रद्धानत हो कर कहा - देवी जी, आप मेरे साथ अन्याय कर रही हैं, और मुझसे ज्यादा अपने साथ। संसार में ऐसे बहुत कम प्राणी हैं, जिनके प्रति मेरे मन में श्रद्धा हो। उन्हीं में एक आप हैं। आपका धैर्य और त्याग और शील और प्रेम अनुपम