जिससे मिठास भी मिल सकती है, कड़वापन भी। उसके अंदर पड़ने वाले बीज में जैसी शक्ति हो।
'आप पछता रहे होंगे, कहाँ से आज इससे मुलाकात हो गई।'
'मैं अगर कहूँ कि मुझे आज ही जीवन का वास्तविक आनंद मिला है, तो शायद आपको विश्वास न आए!'
'मैंने आपके सिर पर इतना बड़ा भार रख दिया।'
मेहता ने श्रद्धा-मधुर स्वर में कहा - आप मुझे लज्जित कर रही हैं देवी जी! मैं कह चुका, मैं आपका सेवक हूँ। आपके हित में मेरे प्राण भी निकल जाएँ, तो मैं
जिससे मिठास भी मिल सकती है, कड़वापन भी। उसके अंदर पड़ने वाले बीज में जैसी शक्ति हो।
'आप पछता रहे होंगे, कहाँ से आज इससे मुलाकात हो गई।'
'मैं अगर कहूँ कि मुझे आज ही जीवन का वास्तविक आनंद मिला है, तो शायद आपको विश्वास न आए!'
'मैंने आपके सिर पर इतना बड़ा भार रख दिया।'
मेहता ने श्रद्धा-मधुर स्वर में कहा - आप मुझे लज्जित कर रही हैं देवी जी! मैं कह चुका, मैं आपका सेवक हूँ। आपके हित में मेरे प्राण भी निकल जाएँ, तो मैं