मेहता ताँगे के पैसे चुका कर लौटे, तो गोविंदी ने कहा - लेकिन आप मुझे कहाँ ले जाएँगे?
मेहता ने चौंक कर पूछा - क्यों, आपके घर पहुँचा दूँगा।
'वह मेरा घर नहीं है मेहता जी!'
'और क्या मिस्टर खन्ना का घर है?'
'यह भी क्या पूछने की बात है? अब वह घर मेरा नहीं रहा। जहाँ अपमान और धिक्कार मिले, उसे मैं अपना घर नहीं कह सकती, न समझ सकती हूँ।'
मेहता ने दर्द-भरे स्वर में, जिसका एक-एक अक्षर उनके अंत:करण से निकल रहा था, कहा - नहीं देवी जी,
मेहता ताँगे के पैसे चुका कर लौटे, तो गोविंदी ने कहा - लेकिन आप मुझे कहाँ ले जाएँगे?
मेहता ने चौंक कर पूछा - क्यों, आपके घर पहुँचा दूँगा।
'वह मेरा घर नहीं है मेहता जी!'
'और क्या मिस्टर खन्ना का घर है?'
'यह भी क्या पूछने की बात है? अब वह घर मेरा नहीं रहा। जहाँ अपमान और धिक्कार मिले, उसे मैं अपना घर नहीं कह सकती, न समझ सकती हूँ।'
मेहता ने दर्द-भरे स्वर में, जिसका एक-एक अक्षर उनके अंत:करण से निकल रहा था, कहा - नहीं देवी जी,