चली। मेहता ने बढ़ कर कार का द्वार खोल दिया। गोविंदी अंदर जा बैठी। कार चली, मगर दोनों मौन थे।
गोविंदी जब अपने द्वार पर पहुँच कर कार से उतरी, तो बिजली के प्रकाश में मेहता ने देखा, उसकी आँखें सजल हैं।
बच्चे घर में से निकल आए और अम्माँ-अम्माँ कहते हुए माता से लिपट गए। गोविंदी के मुख पर मातृत्व की उज्ज्वल गौरवमयी ज्योति चमक उठी।
उसने मेहता से कहा - इस कष्ट के लिए आपको बहुत धन्यवाद। और सिर नीचा कर लिया। आँसू की एक बूँद उसके कपोल पर आ गिरी थी।
चली। मेहता ने बढ़ कर कार का द्वार खोल दिया। गोविंदी अंदर जा बैठी। कार चली, मगर दोनों मौन थे।
गोविंदी जब अपने द्वार पर पहुँच कर कार से उतरी, तो बिजली के प्रकाश में मेहता ने देखा, उसकी आँखें सजल हैं।
बच्चे घर में से निकल आए और अम्माँ-अम्माँ कहते हुए माता से लिपट गए। गोविंदी के मुख पर मातृत्व की उज्ज्वल गौरवमयी ज्योति चमक उठी।
उसने मेहता से कहा - इस कष्ट के लिए आपको बहुत धन्यवाद। और सिर नीचा कर लिया। आँसू की एक बूँद उसके कपोल पर आ गिरी थी।