वह इस समय जैसे भाप बन कर उसे यंत्र की-सी अंध-शक्ति प्रदान कर रहा था। उसकी आँखों में अँधेरा छाने लगा। सिर में फिरकी-सी चल रही थी। फिर भी उसके हाथ यंत्र की गति से, बिना थके, बिना रुके, उठ रहे थे। उसकी देह से पसीने की धार निकल रही थी, मुँह से फिचकुर छूट रहा था, और सिर में धम-धम का शब्द हो रहा था, पर उस पर जैसे कोई भूत सवार हो गया हो।
सहसा उसकी आँखों में निविड़ अंधकार छा गया। मालूम हुआ, वह जमीन में धँसा जा रहा है। उसने
वह इस समय जैसे भाप बन कर उसे यंत्र की-सी अंध-शक्ति प्रदान कर रहा था। उसकी आँखों में अँधेरा छाने लगा। सिर में फिरकी-सी चल रही थी। फिर भी उसके हाथ यंत्र की गति से, बिना थके, बिना रुके, उठ रहे थे। उसकी देह से पसीने की धार निकल रही थी, मुँह से फिचकुर छूट रहा था, और सिर में धम-धम का शब्द हो रहा था, पर उस पर जैसे कोई भूत सवार हो गया हो।
सहसा उसकी आँखों में निविड़ अंधकार छा गया। मालूम हुआ, वह जमीन में धँसा जा रहा है। उसने