उपद्रव तो इतना बड़ा किया था कि उस क्रोध में पा जाते, तो मुँह लाल कर देते।'
'तो तुम्हें भी खूब गालियाँ देते होंगे?'
'कभी नहीं, भूल कर भी नहीं। अम्माँ तो पहले बिगड़ी थीं, लेकिन दादा ने तो कभी कुछ नहीं कहा - जब बुलाते हैं, बडे प्यार से। मेरा सिर भी दुखता है, तो बेचैन हो जाते हैं। अपने बाप को देखते तो मैं इन्हें देवता समझती हूँ। अम्माँ को समझाया करते हैं, बहू को कुछ न कहना। तुम्हारे ऊपर सैकड़ों बार बिगड़ चुके हैं कि इसे
उपद्रव तो इतना बड़ा किया था कि उस क्रोध में पा जाते, तो मुँह लाल कर देते।'
'तो तुम्हें भी खूब गालियाँ देते होंगे?'
'कभी नहीं, भूल कर भी नहीं। अम्माँ तो पहले बिगड़ी थीं, लेकिन दादा ने तो कभी कुछ नहीं कहा - जब बुलाते हैं, बडे प्यार से। मेरा सिर भी दुखता है, तो बेचैन हो जाते हैं। अपने बाप को देखते तो मैं इन्हें देवता समझती हूँ। अम्माँ को समझाया करते हैं, बहू को कुछ न कहना। तुम्हारे ऊपर सैकड़ों बार बिगड़ चुके हैं कि इसे