प्रतिज्ञा - Pratigya

यहाँ चली आई। प्रेमा उसका हाथ पकड़े हुए ऊपर अपने कमरे में ले गई।

प्रेमा - 'भैया में किसी तरफ ताकने की लत नहीं है। यही तो उनमें एक गुण है। पतिदेव कहीं गए हैं क्या?'

प्रेमा - 'सभा में नहीं गए? आज तो बड़ी भारी सभा हुई है।'

प्रेमा - 'आज की सभा देखने लायक थी। तुम होती तो मैं भी जाती, समाज सुधार पर एक महाशय का बहुत अच्छा व्याख्यान हुआ।'

प्रेमा ने हँस कर कहा - 'नहीं बहन, समाज में स्त्री और पुरुष दोनों ही हैं और जब तक दोनों की उन्नति न होगी,


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यहाँ चली आई। प्रेमा उसका हाथ पकड़े हुए ऊपर अपने कमरे में ले गई।

प्रेमा - 'भैया में किसी तरफ ताकने की लत नहीं है। यही तो उनमें एक गुण है। पतिदेव कहीं गए हैं क्या?'

प्रेमा - 'सभा में नहीं गए? आज तो बड़ी भारी सभा हुई है।'

प्रेमा - 'आज की सभा देखने लायक थी। तुम होती तो मैं भी जाती, समाज सुधार पर एक महाशय का बहुत अच्छा व्याख्यान हुआ।'

प्रेमा ने हँस कर कहा - 'नहीं बहन, समाज में स्त्री और पुरुष दोनों ही हैं और जब तक दोनों की उन्नति न होगी,


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