प्रतिज्ञा - Pratigya

लेकिन मन किसी तरह नहीं मानता। अवश्य ही पूर्व जन्म में तुमसे मेरा कोई घनिष्ठ संबंध रहा होगा, कदाचित उस जन्म में भी मेरी यह लालसा अतृप्त ही रही होगी। तुम्हारे चरणों पर गिर कर एक बार रो लेने की इच्छा से ही मैं तुम्हें लाया। बस, यह समझ लो कि मेरा जीवन तुम्हारी दया पर निर्भर है। अगर तुम्हारी आँखें मेरी तरफ से यों ही फिरी रहीं, तो देख लेना, एक दिन कमलाप्रसाद की लाश या तो इसी कमरे में तपड़ती हुई पाओगी, या गंगा-तट पर, मेरा यह निश्चय है।


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लेकिन मन किसी तरह नहीं मानता। अवश्य ही पूर्व जन्म में तुमसे मेरा कोई घनिष्ठ संबंध रहा होगा, कदाचित उस जन्म में भी मेरी यह लालसा अतृप्त ही रही होगी। तुम्हारे चरणों पर गिर कर एक बार रो लेने की इच्छा से ही मैं तुम्हें लाया। बस, यह समझ लो कि मेरा जीवन तुम्हारी दया पर निर्भर है। अगर तुम्हारी आँखें मेरी तरफ से यों ही फिरी रहीं, तो देख लेना, एक दिन कमलाप्रसाद की लाश या तो इसी कमरे में तपड़ती हुई पाओगी, या गंगा-तट पर, मेरा यह निश्चय है।


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