प्रतिज्ञा - Pratigya

तुमने तो आज दुश्मनों की जबान बंद कर दी। सब-के-सब घबराए हुए हैं। आज मजा तो जब आए कि चंदे की अपील खाली जाए, कौड़ी न मिले।'

कमलाप्रसाद - 'कौन, अगर पाँच सौ से ज्यादा पा जाएँ तो मूँछ मुँड़ा लूँ, काशी में मुँह न दिखाऊँ। अभी एक हफ्ता बाकी है। घर-घर जाऊँगा। पिता जी ने मुकाबले में कमर बाँध ली है। वह तो पहले ही सोच रहे थे कि इन विधर्मियों का रंग फीका करना चाहिए, लेकिन कोई अच्छा बोलने वाला नजर न आता था। अब आपके सहयोग से तो हम


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तुमने तो आज दुश्मनों की जबान बंद कर दी। सब-के-सब घबराए हुए हैं। आज मजा तो जब आए कि चंदे की अपील खाली जाए, कौड़ी न मिले।'

कमलाप्रसाद - 'कौन, अगर पाँच सौ से ज्यादा पा जाएँ तो मूँछ मुँड़ा लूँ, काशी में मुँह न दिखाऊँ। अभी एक हफ्ता बाकी है। घर-घर जाऊँगा। पिता जी ने मुकाबले में कमर बाँध ली है। वह तो पहले ही सोच रहे थे कि इन विधर्मियों का रंग फीका करना चाहिए, लेकिन कोई अच्छा बोलने वाला नजर न आता था। अब आपके सहयोग से तो हम


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