प्रतिज्ञा - Pratigya

कि अमृतराय का उसमें हाथ है? इनमें इतनी सहानुभूति भी नहीं, सब कुछ जान कर भी अनजान बनते हैं!

प्रेमा कुछ निश्चय न कर सकी कि इस खबर पर प्रसन्न हो या खिन्न? दाननाथ ने यह बात किस इरादे से कही? उसका क्या आशय था, वह कुछ न जान सकी। दाननाथ कदाचित उसका मनोभाव ताड़ गए। बोले - 'अब उसके विषय में कोई चिंता न रही। अमृतराय उसका बेड़ा पार लगा देंगे?'

दाननाथ ने कुछ लज्जित हो कर कहा - 'अब मुझे ऐसा जान पड़ता है कि अमृतराय पर मेरा संदेह


283 of 305

कि अमृतराय का उसमें हाथ है? इनमें इतनी सहानुभूति भी नहीं, सब कुछ जान कर भी अनजान बनते हैं!

प्रेमा कुछ निश्चय न कर सकी कि इस खबर पर प्रसन्न हो या खिन्न? दाननाथ ने यह बात किस इरादे से कही? उसका क्या आशय था, वह कुछ न जान सकी। दाननाथ कदाचित उसका मनोभाव ताड़ गए। बोले - 'अब उसके विषय में कोई चिंता न रही। अमृतराय उसका बेड़ा पार लगा देंगे?'

दाननाथ ने कुछ लज्जित हो कर कहा - 'अब मुझे ऐसा जान पड़ता है कि अमृतराय पर मेरा संदेह


283 of 305