बदरीप्रसाद - 'तुम उससे इसकी चर्चा करना। कल ही।'
प्रेमा - 'नहीं दादा, मुझसे न बनेगा। वह और मैं दोनों ही अब तक बहनों की तरह रही हैं, मुझसे इस ढंग की बात अब न करते बनेगी। मैं तो रोने लगूँगी।'
बदरीप्रसाद - 'तो मैं ही सब ठीक कर लूँगा। हाँ, कल शाम मुझे अवकाश न मिलेगा, तब तक तुम्हारी अम्माँ जी से भी बातें होंगी। शायद वह उसके यहाँ रहने पर राजी हो जाएँ।'
कमलाप्रसाद गृह-प्रबंध में अपने को लासानी समझते थे। यों तो बुद्धि
बदरीप्रसाद - 'तुम उससे इसकी चर्चा करना। कल ही।'
प्रेमा - 'नहीं दादा, मुझसे न बनेगा। वह और मैं दोनों ही अब तक बहनों की तरह रही हैं, मुझसे इस ढंग की बात अब न करते बनेगी। मैं तो रोने लगूँगी।'
बदरीप्रसाद - 'तो मैं ही सब ठीक कर लूँगा। हाँ, कल शाम मुझे अवकाश न मिलेगा, तब तक तुम्हारी अम्माँ जी से भी बातें होंगी। शायद वह उसके यहाँ रहने पर राजी हो जाएँ।'
कमलाप्रसाद गृह-प्रबंध में अपने को लासानी समझते थे। यों तो बुद्धि