इंडिया आॅफिस लाइब्रेरी में प्रवेश पा लिया। लगभग डेढ़ वर्ष तक वे इंडिया आॅफिस लाइब्रेरी और ब्रिटिष म्यूजियम लाइब्रेरी में सन् 1857 संबंधी दस्तावेजों एवं ब्रिटिष लेखन के महासमुद्र में डुबकियां लगाते रहे। जातीय
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अहंकार और विद्वेष-जनित पूर्वग्रही ब्रिटिष लेखन में छिपे सत्य को उन्होंने खोज निकाला। 1857 के वास्तविक स्वरूप का साक्षात्कार करने में वे सफल हुए। उन्होंने 1857 को एक मामूली सिपाही विद्रोह के
इंडिया आॅफिस लाइब्रेरी में प्रवेश पा लिया। लगभग डेढ़ वर्ष तक वे इंडिया आॅफिस लाइब्रेरी और ब्रिटिष म्यूजियम लाइब्रेरी में सन् 1857 संबंधी दस्तावेजों एवं ब्रिटिष लेखन के महासमुद्र में डुबकियां लगाते रहे। जातीय
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अहंकार और विद्वेष-जनित पूर्वग्रही ब्रिटिष लेखन में छिपे सत्य को उन्होंने खोज निकाला। 1857 के वास्तविक स्वरूप का साक्षात्कार करने में वे सफल हुए। उन्होंने 1857 को एक मामूली सिपाही विद्रोह के