और ये गंवारू शंका केवल हिंदुस्थान की जनता या कुछ अंगे्रजी लेखकों की कल्पना की तरह केवल एशियाटिक लोगों के ही मन मकें उत्पन्न नहीं हुई। जहां-जहां अन्याय की परमावधि होती है और राष्ट्र-के-राष्ट्र सुलग उठते हैं, जहां-जहां राष्ट्रीय युद्ध लडे़ जाते हैं वहां-वहां राष्ट्रीय अन्याय का प्रतिशोध राष्ट्रीय वध से ही लिया जाता है। जब स्पेनवासियों ने मूर लोगों से अपनी स्वतंत्रता वापस छीन ली तब मूर लोगों की क्या दशा
और ये गंवारू शंका केवल हिंदुस्थान की जनता या कुछ अंगे्रजी लेखकों की कल्पना की तरह केवल एशियाटिक लोगों के ही मन मकें उत्पन्न नहीं हुई। जहां-जहां अन्याय की परमावधि होती है और राष्ट्र-के-राष्ट्र सुलग उठते हैं, जहां-जहां राष्ट्रीय युद्ध लडे़ जाते हैं वहां-वहां राष्ट्रीय अन्याय का प्रतिशोध राष्ट्रीय वध से ही लिया जाता है। जब स्पेनवासियों ने मूर लोगों से अपनी स्वतंत्रता वापस छीन ली तब मूर लोगों की क्या दशा