1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

संपूर्ण दोष उस विषैले सांप के कालकूट विष की ओर ही होना चाहिए। अन्यथा विष देश के विरूद्ध ऐसा भयानक प्रतिशोध मानव स्वभाव में नहीं बैठता और निर्दय शासन को विषैले सांप का डर न हो तो उसकी वह कालकूट जीभ आज इतने बिलों में भी जीवित न रहती। सारांश यह कि अन्याय के अतिरेक के कारण मानवी मन में प्रतिशोध की प्रतिक्रिया जब-जब अपरिहार्य और रक्तपात आदि अमानुषिक कार्य पक्की तरह शुरू होते ही हैं, यह इतिहास का साक्ष्य


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संपूर्ण दोष उस विषैले सांप के कालकूट विष की ओर ही होना चाहिए। अन्यथा विष देश के विरूद्ध ऐसा भयानक प्रतिशोध मानव स्वभाव में नहीं बैठता और निर्दय शासन को विषैले सांप का डर न हो तो उसकी वह कालकूट जीभ आज इतने बिलों में भी जीवित न रहती। सारांश यह कि अन्याय के अतिरेक के कारण मानवी मन में प्रतिशोध की प्रतिक्रिया जब-जब अपरिहार्य और रक्तपात आदि अमानुषिक कार्य पक्की तरह शुरू होते ही हैं, यह इतिहास का साक्ष्य


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