1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

में सारा हिंदुस्थान अपूर्व एकता में बंध गया। देश-सेवा के लिए इस भयानक स्थिति से पत्थर भी पिघलने लगा।

कैसा भयंकर विस्फोट! और कितने अकस्मात् तड़ित वेग से ! एक क्षण में यह शांत दिखनेवाला ज्वालामुखी दिग्गजों के कान के परदे फट जाए, ऐसे कड़कड़ाहट से तड़क-फूटकर दुभंग, शतभंग, सहóभंग हो गया। शत्रु जहां पैर रखे वहां उसका भस्म। एक अंगे्रज इतिहासकार लिखता है-‘‘जिनकी जान पर हमारी सुरक्षा टिकी हुई थी वे सरकारी नौकर


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में सारा हिंदुस्थान अपूर्व एकता में बंध गया। देश-सेवा के लिए इस भयानक स्थिति से पत्थर भी पिघलने लगा।

कैसा भयंकर विस्फोट! और कितने अकस्मात् तड़ित वेग से ! एक क्षण में यह शांत दिखनेवाला ज्वालामुखी दिग्गजों के कान के परदे फट जाए, ऐसे कड़कड़ाहट से तड़क-फूटकर दुभंग, शतभंग, सहóभंग हो गया। शत्रु जहां पैर रखे वहां उसका भस्म। एक अंगे्रज इतिहासकार लिखता है-‘‘जिनकी जान पर हमारी सुरक्षा टिकी हुई थी वे सरकारी नौकर


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