1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

अपनी जाति की मान-रक्षा के लिए जिन हजारों हिंदुओं ने बलिदान किया उस सम्मान की परिवूर्णता करने का कंकण उस नई हिंदू सŸाा ने अपने हाथ में बांधा। पुणे से एक हिंदू वीर भाऊसाहब पेशवा समर्थ सेना के साथ आक्रमण करते निकला और उसने दिल्ली के तख्त-सिंहासन-पर कब्जा किया और हिंदू संस्कृति पर लगा गुलामी का कलंक धो डाला। हिंदुस्थान गुलामी उतारकर और पराजय पोंछकर फिर से स्वतंत्र हुआ। हिंदुभूमि के हिंदू ही फिर से मालिक हुए-धनी हुए।


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अपनी जाति की मान-रक्षा के लिए जिन हजारों हिंदुओं ने बलिदान किया उस सम्मान की परिवूर्णता करने का कंकण उस नई हिंदू सŸाा ने अपने हाथ में बांधा। पुणे से एक हिंदू वीर भाऊसाहब पेशवा समर्थ सेना के साथ आक्रमण करते निकला और उसने दिल्ली के तख्त-सिंहासन-पर कब्जा किया और हिंदू संस्कृति पर लगा गुलामी का कलंक धो डाला। हिंदुस्थान गुलामी उतारकर और पराजय पोंछकर फिर से स्वतंत्र हुआ। हिंदुभूमि के हिंदू ही फिर से मालिक हुए-धनी हुए।


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