रहे थे। स्थानाभाव के कारण उन सबका वर्णन यहां नहीं कर सकते। ऐसा होते हुए भी 9 जुलाई और फिर से 14 जुलाई के दिन जिस दृढ़ता से
1857 का स्वातंत्र्य समर - 247
क्रांतिकारी लड़े और अंगे्रजों की तरह ही क्रांतिकारियों ने शूरता का कमाल दिखाया-वे अवसर महŸवपूर्ण और स्फूर्तिदायक होने से उन्हें छोड़ा नहीं जा सकता। पहले दिन अंगे्रजी घुड़सवार को हराकर उन्हें भगा दिया गया। अंगे्रजी तोपखाना बंद कर दिया गया। एक शूर सिपाही
रहे थे। स्थानाभाव के कारण उन सबका वर्णन यहां नहीं कर सकते। ऐसा होते हुए भी 9 जुलाई और फिर से 14 जुलाई के दिन जिस दृढ़ता से
1857 का स्वातंत्र्य समर - 247
क्रांतिकारी लड़े और अंगे्रजों की तरह ही क्रांतिकारियों ने शूरता का कमाल दिखाया-वे अवसर महŸवपूर्ण और स्फूर्तिदायक होने से उन्हें छोड़ा नहीं जा सकता। पहले दिन अंगे्रजी घुड़सवार को हराकर उन्हें भगा दिया गया। अंगे्रजी तोपखाना बंद कर दिया गया। एक शूर सिपाही