मुद्दों पर युद्ध सभा में बहुत चर्चा होकर अंत में दूसरे रास्ते का अनुसरण करना तय हुआ। 16 जुलाई को अंगे्रजी सेना कानपुर के पास आने लगी। कानपुर के कुएं की कथा उन्हें अभी तक ज्ञात न होने से यद्यपि व्हीलर ला का किला हाथ से निकल गया, तब भी बीबीगढ़़ को विद्रोहियों के कब्जे से छुड़ा लेने की जिद उन्हें धूप, श्रम और लड़ाई में भी एक क्षण विश्राम नहीं लेने रे रही थी। कानपुर शहर के शिखर दिखते ही हैवलाॅक को इष्ट समय
मुद्दों पर युद्ध सभा में बहुत चर्चा होकर अंत में दूसरे रास्ते का अनुसरण करना तय हुआ। 16 जुलाई को अंगे्रजी सेना कानपुर के पास आने लगी। कानपुर के कुएं की कथा उन्हें अभी तक ज्ञात न होने से यद्यपि व्हीलर ला का किला हाथ से निकल गया, तब भी बीबीगढ़़ को विद्रोहियों के कब्जे से छुड़ा लेने की जिद उन्हें धूप, श्रम और लड़ाई में भी एक क्षण विश्राम नहीं लेने रे रही थी। कानपुर शहर के शिखर दिखते ही हैवलाॅक को इष्ट समय