1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

ने शहर के उन ब्राह्यणों को पकड़कर बुलाया जिनपर विद्रोह में सम्मिलित होने का शक था। उन्हें फांसी का दंड देकर फांसी पर लटकाने के पहले वह जमा हुआ रक्त जीभ से चाटने और फिर वह हिस्सा हाथ से झाड़ू लेकर धोने का बाध्य किया गया। जिन्हें एक क्षण के बाद मार डालना हे उनको यह अप्रतिम दंड देने का कारण देते हुए अंगे्रज अधिकारी कहते हैं, ‘‘फिरंगी रक्त का स्पर्श करना और वह भंगी के झाड़ू से धोना, यह बात उच्च जाति के हिंदुओं को धर्मभ्रष्ट करनेवाली है,


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ने शहर के उन ब्राह्यणों को पकड़कर बुलाया जिनपर विद्रोह में सम्मिलित होने का शक था। उन्हें फांसी का दंड देकर फांसी पर लटकाने के पहले वह जमा हुआ रक्त जीभ से चाटने और फिर वह हिस्सा हाथ से झाड़ू लेकर धोने का बाध्य किया गया। जिन्हें एक क्षण के बाद मार डालना हे उनको यह अप्रतिम दंड देने का कारण देते हुए अंगे्रज अधिकारी कहते हैं, ‘‘फिरंगी रक्त का स्पर्श करना और वह भंगी के झाड़ू से धोना, यह बात उच्च जाति के हिंदुओं को धर्मभ्रष्ट करनेवाली है,


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