यह भी सच था कि इलाहाबाद से कानपुर आते समय हैवलाॅक ने जो लगन और उत्साह प्रदर्शित किया वह यों तो दुष्कर कार्य कर डालने की स्फूर्ति देनेवाला था, परंतु अवध में जहां विद्रोह की ज्वाला न सुलगी हुई हो, ऐसा एक कदम भर स्थान इस समय शेष नहीं था। हिंदुस्थान में जहां पुरबिया सिपाहियों ने विद्रोह प्रारंभ किया, उन पुरबियों का अवध पालना होने से वहां के गावं-गावं में, झोंपड़े-झोंपड़े मंे उन पुरबियों के मां-बाप, बच्चे-बच्चों,
यह भी सच था कि इलाहाबाद से कानपुर आते समय हैवलाॅक ने जो लगन और उत्साह प्रदर्शित किया वह यों तो दुष्कर कार्य कर डालने की स्फूर्ति देनेवाला था, परंतु अवध में जहां विद्रोह की ज्वाला न सुलगी हुई हो, ऐसा एक कदम भर स्थान इस समय शेष नहीं था। हिंदुस्थान में जहां पुरबिया सिपाहियों ने विद्रोह प्रारंभ किया, उन पुरबियों का अवध पालना होने से वहां के गावं-गावं में, झोंपड़े-झोंपड़े मंे उन पुरबियों के मां-बाप, बच्चे-बच्चों,