1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

बैठकें सुरक्षित हो जाती थी। ठीक समय पर अंगे्रजों के विरूद्ध लड़ने को तैयार सैकड़ों लोगों को अपने सदस्यों के अलग-अलग नाम पर नौकर रखकर उस गुप्त लश्कर का वेतन क्रांति समिति से दिया जाता। पुलिस से लेकर पुस्तक विक्रेता तक पटना शहर में अंगे्रजों के प्रति द्वेष और स्वराज्य की चेतना से अंदर-ही-अंदर सुलगती ज्वालाएं उस विस्तृत प्रदेश में दसों दिशाओं को गुप्त चेतना देते दौड़ने गली। बड़े-बड़े जमींदारों से और उस भाग


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बैठकें सुरक्षित हो जाती थी। ठीक समय पर अंगे्रजों के विरूद्ध लड़ने को तैयार सैकड़ों लोगों को अपने सदस्यों के अलग-अलग नाम पर नौकर रखकर उस गुप्त लश्कर का वेतन क्रांति समिति से दिया जाता। पुलिस से लेकर पुस्तक विक्रेता तक पटना शहर में अंगे्रजों के प्रति द्वेष और स्वराज्य की चेतना से अंदर-ही-अंदर सुलगती ज्वालाएं उस विस्तृत प्रदेश में दसों दिशाओं को गुप्त चेतना देते दौड़ने गली। बड़े-बड़े जमींदारों से और उस भाग


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