1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

भयंकर चाल और भयंकर बोल! हर-हर महादेव का बोल! अफजल खां वध के पोवाड़ा की चाल!

और उस चाल पर यह भीषण रणगीत चालू था। कुंवर सिंह के मन में राज्य क्रांति के विचार घूम रहे हैं। स्वदेश क स्वतंत्रता के लिए उसने सारे हिंदुस्थान के क्रांति केंद्रों से संपर्क बनाया हुआ है। उस पटना विभाग के हजारों सिपाही गुप्त रूप से उससे मिल गए हैं। ऐसे अलग-अलग समाचार पटना के कमिश्नर टेलर को ज्ञात हुए। यह बात फिर भी टेलर को असंभव


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भयंकर चाल और भयंकर बोल! हर-हर महादेव का बोल! अफजल खां वध के पोवाड़ा की चाल!

और उस चाल पर यह भीषण रणगीत चालू था। कुंवर सिंह के मन में राज्य क्रांति के विचार घूम रहे हैं। स्वदेश क स्वतंत्रता के लिए उसने सारे हिंदुस्थान के क्रांति केंद्रों से संपर्क बनाया हुआ है। उस पटना विभाग के हजारों सिपाही गुप्त रूप से उससे मिल गए हैं। ऐसे अलग-अलग समाचार पटना के कमिश्नर टेलर को ज्ञात हुए। यह बात फिर भी टेलर को असंभव


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