1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

आने से वह लाभ मिलने पर दिल्ली में निराश की छाया पड़ने लगी। नीमच और बरेली की सेना एक-दूसरे के सिर निराशा का खपरा फोड़ने लगी और वेतन मिलने के बाद भी बदमाश सिपाही फिर-फिर निराशा का खपरा फोड़ने लगी और वेतन मिलने के बाद भी बदमाश सिपाही फिर-फिर वेतन का तगादा क रवह न मिलने पर शहर के श्रीमान लोगों पर अत्याचार करने की धौंस देने लगे। तब बख्तर खान ने बादशाह की इ च्छा से सारे नेता, सारी सेना एवं चुने हुए नागिरिकों


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आने से वह लाभ मिलने पर दिल्ली में निराश की छाया पड़ने लगी। नीमच और बरेली की सेना एक-दूसरे के सिर निराशा का खपरा फोड़ने लगी और वेतन मिलने के बाद भी बदमाश सिपाही फिर-फिर निराशा का खपरा फोड़ने लगी और वेतन मिलने के बाद भी बदमाश सिपाही फिर-फिर वेतन का तगादा क रवह न मिलने पर शहर के श्रीमान लोगों पर अत्याचार करने की धौंस देने लगे। तब बख्तर खान ने बादशाह की इ च्छा से सारे नेता, सारी सेना एवं चुने हुए नागिरिकों


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