की सीमा शेष नहीं रही। बेश कवे लड़े बड़ी बहादुरी से, शत्रु भी स्तुति करें-इतनी शूरता से लड़े। पर वह शूरता निष्फल। बंुदेल की सराय की लड़ाई के बाद विद्रोहियों की ऐसी पराजय नहीं हुई थी। नीमच की पूरी ब्रिगेड उस दिन नष्ट हो गई। स्वयं के द्वारा जिसे अधिकार सौंप गए थे उसके आदेश का पालन न करके अहंभाव के किए गए आचरण का ऐसा फल मिला। बिना आदेश के शूरता भी वीरता के अभाव
1857 का स्वातंत्र्य समर - 276
जैसी ही निष्फल
की सीमा शेष नहीं रही। बेश कवे लड़े बड़ी बहादुरी से, शत्रु भी स्तुति करें-इतनी शूरता से लड़े। पर वह शूरता निष्फल। बंुदेल की सराय की लड़ाई के बाद विद्रोहियों की ऐसी पराजय नहीं हुई थी। नीमच की पूरी ब्रिगेड उस दिन नष्ट हो गई। स्वयं के द्वारा जिसे अधिकार सौंप गए थे उसके आदेश का पालन न करके अहंभाव के किए गए आचरण का ऐसा फल मिला। बिना आदेश के शूरता भी वीरता के अभाव
1857 का स्वातंत्र्य समर - 276
जैसी ही निष्फल