1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

में अधिक देर न लड़ते हुए हम बाहर के प्रदेशों में युद्ध करेन निकल पड़ें, यह एक पक्ष का विचार बना और दूसरे पक्ष का दृढ़ विचार था कि मृत्यु-पर्यंत दिल्ली समर्पण न करें। अंगे्रजों में कितने ही मतांतर हों, तब भी बहुमत का सम्मान कर अंत में भिन्नता को एक वाक्य कर लेने का अमूल्य सद्गुण भी था इधर क्रांतिकारी सिपाहयिों की अंधरे नगरी में उसका अभाव होने से उपर्युक्त दोनों पक्ष एक दिशा में न जाकर अलग-अलग रास्तों पर


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में अधिक देर न लड़ते हुए हम बाहर के प्रदेशों में युद्ध करेन निकल पड़ें, यह एक पक्ष का विचार बना और दूसरे पक्ष का दृढ़ विचार था कि मृत्यु-पर्यंत दिल्ली समर्पण न करें। अंगे्रजों में कितने ही मतांतर हों, तब भी बहुमत का सम्मान कर अंत में भिन्नता को एक वाक्य कर लेने का अमूल्य सद्गुण भी था इधर क्रांतिकारी सिपाहयिों की अंधरे नगरी में उसका अभाव होने से उपर्युक्त दोनों पक्ष एक दिशा में न जाकर अलग-अलग रास्तों पर


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