जीवन के अंतिम क्षण तक भी ढीली नहीं पड़ी थी, यह सिद्ध करने के लिए वे सिपाही शत्रुता जीवन के अंतिम क्षण तक भी ढीली नहीं पड़ी थी, यह सिद्ध करने के लिए वे सिपाही विजय की रŸाी भर परवाह किए बिना अद्भूत कर्मी लोग हमें चिढ़ाते अचल खड़े रहे थे।’’
अंगे्रजों के हाथ में दिल्ली का तीन-चैथाई भाग चला जाने के बाद कमांडर-इन-चीफ बख्तर खान दिल्ली के बादशाह से मिले और बोले, ‘‘दिल्ली तो अपने हाथ से चली गई है, परंतु इससे विजय की सारी संभावना अपने हाथ से निकल गई,
जीवन के अंतिम क्षण तक भी ढीली नहीं पड़ी थी, यह सिद्ध करने के लिए वे सिपाही शत्रुता जीवन के अंतिम क्षण तक भी ढीली नहीं पड़ी थी, यह सिद्ध करने के लिए वे सिपाही विजय की रŸाी भर परवाह किए बिना अद्भूत कर्मी लोग हमें चिढ़ाते अचल खड़े रहे थे।’’
अंगे्रजों के हाथ में दिल्ली का तीन-चैथाई भाग चला जाने के बाद कमांडर-इन-चीफ बख्तर खान दिल्ली के बादशाह से मिले और बोले, ‘‘दिल्ली तो अपने हाथ से चली गई है, परंतु इससे विजय की सारी संभावना अपने हाथ से निकल गई,