सवकीय सŸाा का सम्मान करने की दृढ़ शिक्षा देते जाएं, दुष्टापूर्ण बंधन का उच्छेद करते हुए निरकुंशता का चस्का न लगे, ऐसी सजगता रखें। परराज्य का एवं परनिर्मित अधिकार का निःपात करते समय स्वराज्य एवं स्वनिर्मित अधिकार को अति पूजनीय-वंदनीय मानते जाएं। पर सŸाा का उच्छेद होते ही स्वदेशीय समाज में अराजकता के नाशकारी प्रभाव न पड़ें, इसिलए तत्काल बहुमत से जो राज्य-घटना निर्माण हो उसे सब लोग वंदनीय मानें। उस राज्य-घटना
सवकीय सŸाा का सम्मान करने की दृढ़ शिक्षा देते जाएं, दुष्टापूर्ण बंधन का उच्छेद करते हुए निरकुंशता का चस्का न लगे, ऐसी सजगता रखें। परराज्य का एवं परनिर्मित अधिकार का निःपात करते समय स्वराज्य एवं स्वनिर्मित अधिकार को अति पूजनीय-वंदनीय मानते जाएं। पर सŸाा का उच्छेद होते ही स्वदेशीय समाज में अराजकता के नाशकारी प्रभाव न पड़ें, इसिलए तत्काल बहुमत से जो राज्य-घटना निर्माण हो उसे सब लोग वंदनीय मानें। उस राज्य-घटना