1857 का स्वातंत्र्य समर - 293
का कारण शौर्य का अभाव नहीं, सैन्याभाव है, यह समझ में आ जाने से अंगे्रजी सेना की आशा विफल हुई; लेकिन आत्मनिष्ठा, जोश और दृढ़ता उस अप्रत्यक्ष पराजय से कम नहीं हुए थे, इसलिए गोरी सेना की नई कुसुम आते ही-लखनऊ को मुक्त करने मैं जल्दी ही फिर निकलूंगा-इस हिम्मत से हैवलाॅक कानपुर में जमा। इस समय नील और हैवलाॅक में व्यक्तिगत मत्सर से कितना वैर हो गया था, हैवलाॅक के नील को लिखे
1857 का स्वातंत्र्य समर - 293
का कारण शौर्य का अभाव नहीं, सैन्याभाव है, यह समझ में आ जाने से अंगे्रजी सेना की आशा विफल हुई; लेकिन आत्मनिष्ठा, जोश और दृढ़ता उस अप्रत्यक्ष पराजय से कम नहीं हुए थे, इसलिए गोरी सेना की नई कुसुम आते ही-लखनऊ को मुक्त करने मैं जल्दी ही फिर निकलूंगा-इस हिम्मत से हैवलाॅक कानपुर में जमा। इस समय नील और हैवलाॅक में व्यक्तिगत मत्सर से कितना वैर हो गया था, हैवलाॅक के नील को लिखे