शाम हुए भयानक रक्तपाम से रास्ते में आई पहले प्रवाह की बाढ़ उतरी नहीं कि तभी स्वयं की पराजय और शत्रु को प्राप्त विजय से उत्पन्न उत्साहभंगता को निरामय स्थान पर फेंककर स्वतंत्रता के
1857 का स्वातंत्र्य समर - 299
लिए उत्सुक लखनऊ शहर ने अंगे्रजी सŸाा को फिर एक बार कैद कर दिया।
स्वतंत्रता संग्राम के पांडे लोगों के इस दृढ़ निश्चयी व्यवहार से केवल लखनऊ की अंगे्रज सेना ही कैंची में नहीं फंसी वरन् कलकŸाा
शाम हुए भयानक रक्तपाम से रास्ते में आई पहले प्रवाह की बाढ़ उतरी नहीं कि तभी स्वयं की पराजय और शत्रु को प्राप्त विजय से उत्पन्न उत्साहभंगता को निरामय स्थान पर फेंककर स्वतंत्रता के
1857 का स्वातंत्र्य समर - 299
लिए उत्सुक लखनऊ शहर ने अंगे्रजी सŸाा को फिर एक बार कैद कर दिया।
स्वतंत्रता संग्राम के पांडे लोगों के इस दृढ़ निश्चयी व्यवहार से केवल लखनऊ की अंगे्रज सेना ही कैंची में नहीं फंसी वरन् कलकŸाा