1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

दूसरा घोषणापत्र जारी किया। उसमें वे कहते हैं-‘‘जीम राजगान वो रोसाए हिंद पर वाझे होके तुम बेहामा उजूः नेकी और फय्याजी में मुश्तईर उद्दईर हों ं ं ंखुदावंत ने तुमको ये मर्तबए आली और मुल्क और दौलत और हुकूमत इसी वास्ते बख्शी है कि तुम उन लोगों को, जो तुम्हारे मजहब में दखलंदाजी करें, गारद करों ं ं ं।’’ (हमें ईश्वर ने संपति, देश, अधिकार किस लिए दिए हैं? ये सभी केवल व्यक्ति से संबंधित सुख-भोग के लिए न होकर स्वधर्म-संरक्षण के पवित्र हेतु के लिए हैं।)


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दूसरा घोषणापत्र जारी किया। उसमें वे कहते हैं-‘‘जीम राजगान वो रोसाए हिंद पर वाझे होके तुम बेहामा उजूः नेकी और फय्याजी में मुश्तईर उद्दईर हों ं ं ंखुदावंत ने तुमको ये मर्तबए आली और मुल्क और दौलत और हुकूमत इसी वास्ते बख्शी है कि तुम उन लोगों को, जो तुम्हारे मजहब में दखलंदाजी करें, गारद करों ं ं ं।’’ (हमें ईश्वर ने संपति, देश, अधिकार किस लिए दिए हैं? ये सभी केवल व्यक्ति से संबंधित सुख-भोग के लिए न होकर स्वधर्म-संरक्षण के पवित्र हेतु के लिए हैं।)


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