1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

इतना ध्यान में रखा जाए तो काफी होगा। जिसका अंतिम उद्देश्य प्राकृतिक रूप से सुंदर हिंद भूमि को अपनी दासी बनाना था, ऐसे दुर्योधन के लिए न्याय कैसा और अन्याय कैसा? इस पाप वासना को तृप्त करने के लिए जो भी साधन मिलें वे सारे वह उपयोग में लाता ही।

इन साधनांे में से पहला साधन था पंजाब से हुई लड़ाई। डलहौजी के पैरों का स्पर्ष हिंदुस्थान के किनारे से होते ही उसे तुरंत यह ध्यान में आया कि पंजाब में जब तक रणजीत


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इतना ध्यान में रखा जाए तो काफी होगा। जिसका अंतिम उद्देश्य प्राकृतिक रूप से सुंदर हिंद भूमि को अपनी दासी बनाना था, ऐसे दुर्योधन के लिए न्याय कैसा और अन्याय कैसा? इस पाप वासना को तृप्त करने के लिए जो भी साधन मिलें वे सारे वह उपयोग में लाता ही।

इन साधनांे में से पहला साधन था पंजाब से हुई लड़ाई। डलहौजी के पैरों का स्पर्ष हिंदुस्थान के किनारे से होते ही उसे तुरंत यह ध्यान में आया कि पंजाब में जब तक रणजीत


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