1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

मरी और रणजीत सिंह का पुत्र दिलीप सिंह दूसरे के दरवाजे टुकड़े जोड़ता पड़ा रहा।

अब हिमालय से कन्याकुमारी तक तो सारा हिंदुस्थान लाल हो गया, परंतु अभी भी सिंधु नदी से इरावती (नदी) तक जैसा चाहिए था वैसा लाल नहीं हुआ था। फिर देर क्यों? ब्रह्यदेष में एक शांति मिशन भेजा कि फतह हुई। केवल वह शांति मिशन शांति का इतने पे्रम से आलिंगन करे कि उसकी पसलियां चूर-चूर हो जाएं। यह अति प्यारा कार्य भी अंत में संपन्न हो


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मरी और रणजीत सिंह का पुत्र दिलीप सिंह दूसरे के दरवाजे टुकड़े जोड़ता पड़ा रहा।

अब हिमालय से कन्याकुमारी तक तो सारा हिंदुस्थान लाल हो गया, परंतु अभी भी सिंधु नदी से इरावती (नदी) तक जैसा चाहिए था वैसा लाल नहीं हुआ था। फिर देर क्यों? ब्रह्यदेष में एक शांति मिशन भेजा कि फतह हुई। केवल वह शांति मिशन शांति का इतने पे्रम से आलिंगन करे कि उसकी पसलियां चूर-चूर हो जाएं। यह अति प्यारा कार्य भी अंत में संपन्न हो


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