सिंचित यह प्रदेश-पंजाब। यही प्रदेश लेने अलेक्जेंडर आया और इसी प्रदेश को बचाने के लिए पोरस लड़ा। इसी प्रदेश को लेकर रावण की भी महत्त्वकांक्षा
1857 का स्वातंत्र्य समर - 48
पूरी हो गई होती। परंतु डलहौजी को पंजाब और ब्रह्यदेष जैसे विस्तृत प्रदेष लेकर भी कोई संतोश न हुआ। हिंदुस्थान की सरहद तो अवष्य बढ़ी, परंतु अब भी अंदर पूर्व बादषाहों के कुछ मजार षेश थे, अतः उन्हें भी उखाड़कर सर्वत्र मैदाान करने की उसने
सिंचित यह प्रदेश-पंजाब। यही प्रदेश लेने अलेक्जेंडर आया और इसी प्रदेश को बचाने के लिए पोरस लड़ा। इसी प्रदेश को लेकर रावण की भी महत्त्वकांक्षा
1857 का स्वातंत्र्य समर - 48
पूरी हो गई होती। परंतु डलहौजी को पंजाब और ब्रह्यदेष जैसे विस्तृत प्रदेष लेकर भी कोई संतोश न हुआ। हिंदुस्थान की सरहद तो अवष्य बढ़ी, परंतु अब भी अंदर पूर्व बादषाहों के कुछ मजार षेश थे, अतः उन्हें भी उखाड़कर सर्वत्र मैदाान करने की उसने