रखने वाले डलहौजी को लगा हो तो कोई आष्चर्य नहीं। सन् 1857 के अप्रैल माह में सतारा के अंतिम महाराज अप्पा साहब दिवंगत हुए । यह समाचार मिलते ही डलहौजी ने वह रियासत हथियाने का निष्चय किया। कारण यह कि राजा की जायज संतति नहीं थी। जायज संतति न होने से गंवार मजदूर की झोंपड़ी भी लावारिस नहीं हो जाती। वह उके द्वारा नियुक्त दत्तक को या उसके निकट संबंधी को दे दी जाती है। पर सतारा? वह तो किसी गंवार की झोंपड़ी न होकर
रखने वाले डलहौजी को लगा हो तो कोई आष्चर्य नहीं। सन् 1857 के अप्रैल माह में सतारा के अंतिम महाराज अप्पा साहब दिवंगत हुए । यह समाचार मिलते ही डलहौजी ने वह रियासत हथियाने का निष्चय किया। कारण यह कि राजा की जायज संतति नहीं थी। जायज संतति न होने से गंवार मजदूर की झोंपड़ी भी लावारिस नहीं हो जाती। वह उके द्वारा नियुक्त दत्तक को या उसके निकट संबंधी को दे दी जाती है। पर सतारा? वह तो किसी गंवार की झोंपड़ी न होकर