1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

जब ओरछा के राजा ने दत्तक लिया तब अंगे्रजों ने उसे स्वीकार करते हुए वचन दिया था-

‘‘हिंदू नरेशों को यह अधिकार है कि वे स्ववंश की शाखा में उत्पन्न उत्तराधिकारी से अलग भी किसी को गोद ले लें। ब्रिटिश सरकार को ऐसे दत्तक को मान्यता देनी होगी; किंतु गोद लेने की यह प्रक्रिया हिंदू शास्त्र के विरूद्ध नहीं होनी चाहिए।’’

इतनी स्पष्ट भाषा में और इतने साफ-साफ दिए गए वचन कागजों में लिखे होते हुए भी यह कहने की


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जब ओरछा के राजा ने दत्तक लिया तब अंगे्रजों ने उसे स्वीकार करते हुए वचन दिया था-

‘‘हिंदू नरेशों को यह अधिकार है कि वे स्ववंश की शाखा में उत्पन्न उत्तराधिकारी से अलग भी किसी को गोद ले लें। ब्रिटिश सरकार को ऐसे दत्तक को मान्यता देनी होगी; किंतु गोद लेने की यह प्रक्रिया हिंदू शास्त्र के विरूद्ध नहीं होनी चाहिए।’’

इतनी स्पष्ट भाषा में और इतने साफ-साफ दिए गए वचन कागजों में लिखे होते हुए भी यह कहने की


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