जब ओरछा के राजा ने दत्तक लिया तब अंगे्रजों ने उसे स्वीकार करते हुए वचन दिया था-
‘‘हिंदू नरेशों को यह अधिकार है कि वे स्ववंश की शाखा में उत्पन्न उत्तराधिकारी से अलग भी किसी को गोद ले लें। ब्रिटिश सरकार को ऐसे दत्तक को मान्यता देनी होगी; किंतु गोद लेने की यह प्रक्रिया हिंदू शास्त्र के विरूद्ध नहीं होनी चाहिए।’’
इतनी स्पष्ट भाषा में और इतने साफ-साफ दिए गए वचन कागजों में लिखे होते हुए भी यह कहने की
जब ओरछा के राजा ने दत्तक लिया तब अंगे्रजों ने उसे स्वीकार करते हुए वचन दिया था-
‘‘हिंदू नरेशों को यह अधिकार है कि वे स्ववंश की शाखा में उत्पन्न उत्तराधिकारी से अलग भी किसी को गोद ले लें। ब्रिटिश सरकार को ऐसे दत्तक को मान्यता देनी होगी; किंतु गोद लेने की यह प्रक्रिया हिंदू शास्त्र के विरूद्ध नहीं होनी चाहिए।’’
इतनी स्पष्ट भाषा में और इतने साफ-साफ दिए गए वचन कागजों में लिखे होते हुए भी यह कहने की