छापे की जानकारी मिल गई। अतः छापा पड़ने के पहले ही पांडुलिपि को वहां से हटा दिया गया और उसे लंदन न भेजकर सुरक्षित पेरिस पहुंचा दिया गया। वहां के भारतीय क्रांतिकारियों ने यह सोचकर कि जर्मनी में संस्कृत गं्रथों की मुद्रण परंपरा होने के कारण वहां देवनागरी लिपि के मराठी गं्रथ को छपवाना संभव होगा, पांडुलिपि को जर्मनी भेज दिया। किंतु निराशा हाथ लगी और मराठी पांडुलिपि वापस आ गई। अब क्रांतिकारी टोली ने निर्णय
छापे की जानकारी मिल गई। अतः छापा पड़ने के पहले ही पांडुलिपि को वहां से हटा दिया गया और उसे लंदन न भेजकर सुरक्षित पेरिस पहुंचा दिया गया। वहां के भारतीय क्रांतिकारियों ने यह सोचकर कि जर्मनी में संस्कृत गं्रथों की मुद्रण परंपरा होने के कारण वहां देवनागरी लिपि के मराठी गं्रथ को छपवाना संभव होगा, पांडुलिपि को जर्मनी भेज दिया। किंतु निराशा हाथ लगी और मराठी पांडुलिपि वापस आ गई। अब क्रांतिकारी टोली ने निर्णय