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की सक्रियता के कारण इंग्लैंड के किसी छापेखाने में छपवाना निरापद नहीं था। पेरिस उन दिनों भारतीय क्रांतिकारियों का गढ़ था; किंतु उस समय तक जर्मनी के विरू˜ फ्रांस और ब्रिटेन का गठबंधन हो चुका था। अतः फ्रांस सरकार का गुप्तचर विभाग भी उन दिनों ब्रिटिश सरकार के दबाव में भारतीय क्रांतिकारियों के पीछे पड़ा हुआ था। जी.एम. जोशी का कहना है कि ‘‘ क्रांतिकारियों ने किसी प्रकार हाॅलैंड के एक छापेखाने को यह
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की सक्रियता के कारण इंग्लैंड के किसी छापेखाने में छपवाना निरापद नहीं था। पेरिस उन दिनों भारतीय क्रांतिकारियों का गढ़ था; किंतु उस समय तक जर्मनी के विरू˜ फ्रांस और ब्रिटेन का गठबंधन हो चुका था। अतः फ्रांस सरकार का गुप्तचर विभाग भी उन दिनों ब्रिटिश सरकार के दबाव में भारतीय क्रांतिकारियों के पीछे पड़ा हुआ था। जी.एम. जोशी का कहना है कि ‘‘ क्रांतिकारियों ने किसी प्रकार हाॅलैंड के एक छापेखाने को यह