1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

कमर में 3 लाख रूपयों की तलवार लटकी हुई है और स्वराज्य एवं स्वधर्म का प्रतिशोध लेने के लिए गुस्से की ज्वाला जिसकी देह से और पानीदार तलवार जिसकी म्यान से बाहर कूदने को तैयार है-उस अंतिम पेशवा को प्रणाम करने के लिए मस्तक नत होने लगता है।

अंत में अंगे्रजीें का अंतिम उत्तर आया कि ‘आपका बाजीराव की पेंशन पर तिनके बराबर भी अधिकार नहीं था। इतना ही नहीं, आपका ब्रह्यवर्त की ओर के प्रदेश पर स्थापित स्वतंत्र


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कमर में 3 लाख रूपयों की तलवार लटकी हुई है और स्वराज्य एवं स्वधर्म का प्रतिशोध लेने के लिए गुस्से की ज्वाला जिसकी देह से और पानीदार तलवार जिसकी म्यान से बाहर कूदने को तैयार है-उस अंतिम पेशवा को प्रणाम करने के लिए मस्तक नत होने लगता है।

अंत में अंगे्रजीें का अंतिम उत्तर आया कि ‘आपका बाजीराव की पेंशन पर तिनके बराबर भी अधिकार नहीं था। इतना ही नहीं, आपका ब्रह्यवर्त की ओर के प्रदेश पर स्थापित स्वतंत्र


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