1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

के बहुत पहले से ही ध्यान में आया हुआ था। अवध के संुदर प्रदेश का वर्णन करते हुए अंगे्रजी ब्ल्यू बुक की सुकोमल भाषा में भी कविता फूट पड़ी है-‘‘इस सुंदर प्रदेश में कहीं-कहीं बीस तो कहीं-कहीं दस फीट पर ही भरपूर जल भंडार हैं। सारा प्रदेश हरे-भरे खेतों से भरा हुआ है। अमराई की छाया से शीतल, बांस के ऊंचे-ऊंचे वन अपने सिर ठाट और शान से उठाए हुए, इमली की घनी छाया, नारंगी की गंध, अंजीर के वृक्षों की विचित्रता


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के बहुत पहले से ही ध्यान में आया हुआ था। अवध के संुदर प्रदेश का वर्णन करते हुए अंगे्रजी ब्ल्यू बुक की सुकोमल भाषा में भी कविता फूट पड़ी है-‘‘इस सुंदर प्रदेश में कहीं-कहीं बीस तो कहीं-कहीं दस फीट पर ही भरपूर जल भंडार हैं। सारा प्रदेश हरे-भरे खेतों से भरा हुआ है। अमराई की छाया से शीतल, बांस के ऊंचे-ऊंचे वन अपने सिर ठाट और शान से उठाए हुए, इमली की घनी छाया, नारंगी की गंध, अंजीर के वृक्षों की विचित्रता


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